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‘टॉयलेट एक विरोध कथा’ बहुओं की से खतरे

‘टॉयलेट एक विरोध कथा’ बहुओं की से खतरे में दिवाली

ससुराल में शौचालय नहीं तो घर की लक्ष्मी ससुराल की जगह मायके में दिवाली मनाएगी. शौचालय नहीं होने से तंग महिलाओं ने पतियों के विरुद्ध आंदोलन का शंखनाद कर दिया. आंदोलन है कि पहले घर मे शौचालय बनवाओ इसके बाद ही वो ससुराल में दिवाली का पर्व मनाएंगी, नहीं तो गांव की बहुएं इस बार अपने-अपने मायके में त्योहार मनाएंगी.

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बिजहा गांव में शौचालय के लिए महिलाओं के इस आंदोलन ने अपना परिणाम भी दिखाना शुरू कर दिया है. गांव की अधिकांश महिलाएं अपना ससुराल छोड़ मायके चली गईं.

वहीं लगभग एक दर्जन जाने की तैयारी में हैं. गांव की बहुओं ने चिट्ठी लिख इस समस्या से जनप्रतिनिधियों को भी अवगत कराया है. अपने-अपने नाम से लिखी चिट्ठी में बहुओं ने साफ लिखा है कि शौचालय नहीं बनने से वो अपने मायके चली जाएंगी.

स्वाति सोनी बनी मिसाल

बहुओं को स्वाति सोनी नाम की महिला ने शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया है. सिंगरौली जिले से जून 2017 में बिजहा गांव के शिवशंकर सोनी से उनकी शादी हुई. स्वाति ने देखा कि उसके ससुराल में शौचालय नहीं है जबकि उसके मायके में है. शुरू में उसने अपने पति और ससुराल के अन्य लोगों से घर में शौचालय बनवाने की मिन्नत की. जब वो लोग नहीं माने तब स्वाति ने गांव की महिला जिला पंचायत सदस्य कृष्णा पटेल को एक चिट्ठी लिखकर अपनी निजता की समस्या से अवगत कराया.

स्वाति सोनी का शौचालय को लेकर अपने घर में शुरू किया गया विरोध अब आंदोलन की ओर बढ़ रहा था. शौचालय निर्माण की मांग को लेकर अपने ससुराल में अड़ी स्वाती ने मायके पक्ष को भी अपनी इस समस्या से अवगत कराया. स्वाति गांव में खुलेआम कहने लगी अगर मुझे पता होता कि इनके घर शौचालय नहीं है तो मैं शादी ही नहीं करती.

एक परिवार के बहू की आवाज पर पूरा गांव एकजुट
इसके बाद भी जब ससुराल पक्ष के लोग शौचालय निर्माण के लिए राजी नहीं हुए तो स्वाति सोनी ने एलान कर दिया कि अब वह अपने मायके वापस चली जाएंगी और तब तक वापस नहीं आएगी जब तक ससुराल में शौचालय का निर्माण नहीं होता है.

शौचालय के लिए स्वाति का उठाया यह कदम गांव में आग की तरह फैल गया. लगभग उन सभी घरों से आवाज आने लगी जहां शौचालय नहीं थे और बहुएं खुले में शौच जाती थीं. सभी ने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को चिट्ठी लिखना शुरू कर दिया.

देखते-देखते गांव की महिलाएं यह कहकर अपना ससुराल छोड़ मायके जाने लगीं की उनके यहां शौचालय नहीं है.

मायकेवाली दिवाली
बिजहा गांव में रहने वाली जिला पंचायत सदस्य कृष्णा पटेल बताती हैं कि गांव की कई महिलाओं ने उन्हें भी चिट्ठी लिखकर इस समस्या से अवगत कराया है और यह भी जिक्र किया है कि शौचालय नहीं होने के कारण वो अपना ससुराल छोड़ मायके में दीवाली मनाएंगी.

जिला पंचायत सदस्य ने बताया कि गांव की कुछ महिलाएं अपने मायके चली गईं हैं और कुछ जाने की तैयारी में हैं. सभी को समझाइश दी जा रही है.

शहडोल मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर महिलाओं के इस आंदोलन की गूंज अब जिले के कोने-कोने में सुनाई दे रही है. जब न्यूज18/ईटीवी की टीम पड़ताल करने ब्यौहारी जनपद के बिजहा गांव पहुंची तो वहां कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए. कई महिलाएं अपने ससुराल जाने के लिए बैग लेकर घर से निकलने की तैयारी में थीं.

महिलाओं का कहना था कि शौचालय नहीं होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, अब बेटियां भी बड़ी हो गईं हैं.

परेशानी में ससुराल पक्ष
मध्य प्रदेश में शौचालय निर्माण के लिए यह अब तक का सबसे अनोखा मामला है जहां गांव की बहुएं एकजुट होकर पूरा का पूरा गांव खाली करने में आमदा हो गईं हैं. एक ओर जहां उनके पति परेशान हैं वहीं दूसरी ओर यह जगह-जगह चर्चा का विषय बना हुआ है.

ससुराल पक्ष के लोग अब आनन-फानन में शौचालय निर्माण की तैयारी में जुटे हैं तो कुछ अब भी खुद को लाचार महसूस करते हुए शौचालय निर्माण में अक्षम बता रहे हैं. लेकिन गांव की इन बहुओं ने अपने इस आंदोलन से स्पष्ट कर दिया है कि वो ससुराल में तभी रहेंगी जब उनके लिए शौचालय का निर्माण होगा.

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